एम् आर डी एम् प्रकोष्ठ का प्रतिवेदन
विषय : एम् आर डी एम् प्रकोष्ठ में डेश बोर्ड का प्रारंभ होना एक अनूठा प्रयास
एम आर डी एम प्रकोष्ठ के सृजन के समय की गई परिकल्पना में हेह उद्देश्य सामिल किया गया था की प्रकोष्ठ में ऐसे उत्पाद तैयार किये जावें जो सम्पूर्ण कंपनी क्षेत्र और उनके अधिकारियों के लिए उपयोगी हों और उनकी वैधता भी हो. ये उत्पाद अपनी आवश्यकता के अनुसार वांछित सूचनाएं और सहयोग प्रदान करने में सक्षम हों जो मैदानी प्रबंधन को मजबूत करने में भी सहायक हों. प्रकोष्ठ को डिझाइन करते समय एक फेक्ट शीट बनाई गई थी वह भी संलग्न की जा रही है. इसके क्रियान्वयन हेतु प्रकोष्ठ में सार्थक और ईमानदार प्रयास किये गए. इनमें से कई उत्पाद वर्तमान में सतर्कता विभाग में उपयोगी होकर फलदाई हुए हैं.
*अत्यंत हर्ष के साथ अवगत कराया जाता है कि एम् आर डी एम् प्रकोष्ठ में अभी एक डेशबोर्ड की स्थापना करके उसे पब्लिश किया जा चुका है जो प्रकोष्ठ के लिए एक मील का पत्थर है. प्रकोष्ठ में स्थापित सर्वर से अभी तक जो सूचनाएँ प्राप्त की जाती रही थी वे केवल सतर्कता विभाग के लिए उपयोगी साबित हो रही थी अब इसका विस्तार डेशबोर्ड के माध्यम से कंपनी के सभी अधिकारियों तक कर दिया गया है जो उन्हें अत्यंत उपयोगी सूचना प्रदान करने में सक्षम होगा. डेशबोर्ड को एकदम सरल बनाकर उसे यूजर फ्रेंडली बनाया गया है जिसे इंटरनेट का सामान्य उपयोग करने वाला भी आसानी से आपरेट कर आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेगा. डेशबोर्ड पर संयोजित उपभोक्ता के बिलिंग आंकड़े इंटरनेट संयोजन के द्वारा 'कभी भी-कहीं भी' प्राप्त किये जा सकते हैं. इसके लिए उसे कार्यालय में जाकर उपभोक्ता का लेजर देखने की आवश्यकता नहीं होगी. सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार अब आपके मोबाईल पर उपलब्ध होने से इस डेशबोर्ड का उपयोग और सरल एवं प्रभावी हो गया है तथा इससे त्वरित जानकारी प्राप्त हो सकेगी. डेशबोर्ड का उपयोग करने की विधि संलग्न की जा रही है.
सूचनाओं का संक्षिप्त विवरण निम्न लिखित है:
राजस्व से सम्बंधित :
अ) आर एम एस संबंधी:
आर एम् एस प्रकोष्ठ में मौजूद आंकड़ों को गोपनीयता के कारणों से सामान्य पहुँच से दूर रखा जाता है जिसके कारण उसे मैदानी संभागों के लिए खुली पहुच नहीं दी जा सकती है. यह ध्यान में रखते हुए उन मूल आंकड़ों पर आधारित आंकड़ों को एम् आर डी एम् प्रकोष्ठ में प्रोसेस किया जा रहा है तत्पश्चात उन्हें मैदानी संभागों के लिए उपयोगी बनाया गया है.
इंदौर शहर वृत्त के सभी संभागों, इंदौर सं. & सं. संभाग, उज्जैन सं. & सं. संभाग एवं उज्जैन शहर संभाग के आर एम् एस सम्बंधित दो वर्षो के आंकड़े संगृहीत करके उन्हें बिलींग संबंधी विवरण हेतु उपयोगी बनाया गया है.अब आगे से प्रतिमाह इन सूचनाओं को टॉप अप किया जाता रहेगा जो एक समृद्ध सूचना भण्डार सिद्ध होगा. इन से शहर के प्रत्येक संयोजित उपभोक्ता के बिलिंग आंकड़े 'कभी भी-कहीं भी' प्राप्त किये जा सकते हैं. इन से प्राप्त नमूना प्रारूप और सूचना सलग्न की जा रही है.
इंदौर शहर वृत्त के सभी संभागों, इंदौर सं. & सं. संभाग, उज्जैन सं. & सं. संभाग एवं उज्जैन शहर संभाग के आर एम् एस सम्बंधित दो वर्षो के आंकड़े संगृहीत करके उन्हें बिलींग संबंधी विवरण हेतु उपयोगी बनाया गया है.अब आगे से प्रतिमाह इन सूचनाओं को टॉप अप किया जाता रहेगा जो एक समृद्ध सूचना भण्डार सिद्ध होगा. इन से शहर के प्रत्येक संयोजित उपभोक्ता के बिलिंग आंकड़े 'कभी भी-कहीं भी' प्राप्त किये जा सकते हैं. इन से प्राप्त नमूना प्रारूप और सूचना सलग्न की जा रही है.
इस सूचना का सीधा लाभ यह होगा कि मैदानी अधिकारी को जहाँ-कहीं इंटेरनेट कि सुविधा होगी वहां वांछित उपभोक्ता के बिलिंग सम्बंधित ऐतिहासिक आंकड़े फिंगर टिप्स पर उपलब्ध होंगे.
आ). सायबेस
जहाँ सायबेस बिलिंग प्रणाली लागू है वहां तीन माह से अधिक के आंकड़े उनके सिस्टम में संग्रहित नहीं रह पाते हैं जो कि प्रणाली का एक दोष है. प्रकोष्ठ में इस बात को गंभीरता से लिया एवं निरंतर इस पर काम किया. इसके लिए बिल प्रिंटिंग के डाटा का प्रिंटिंग स्रोत से लिया गया जो लगभग पिछले दो वर्षों का उपलब्ध हुआ. यद्यपि इसमें से उपभोक्ताओं के आंशिक डाटा उपलब्ध हो सके लेकिन उपलब्ध सभी डाटा से एक डाटा बैंक बनाया गया. एक सुखद बात यह है कि सायबेस के डाटा को ओरेकल डाटा बेस में परिवर्तित कर इस डाटा बैंक में संग्रहीत किया गया है. इसके दो लाभ हुए कि इस संग्रह में मेमोरी कि सीमा नहीं होती दुसरे यह आर एम् एस डाटा बेस के समकक्ष खड़ा हो गया है जो एक ही (कोमन) सोफ्टवेयर से संचालित होने लायक हो गया है. यह एक अप्रतिम उपलब्धि है.
'एच वी सी एम् एस' के बारे में संक्षिप्त जानकारी:
इस कोमन सोफ्टवेयर का नाम है 'एच वी सी एम् एस'. यह वेब साईट पर उपलब्ध है एवं मल्टी यूजर होने से कई लोग इसका सामानांतर उपयोग कर सकते हैं. इस साफ्टवेयर पर अभी और काम किया जा रहा है जिसमें मैदानी अधिकारीयों और एम् आर दी एम् प्रकोष्ठ में 'टू एंड फ्रो सूचना सम्बन्ध कायम हो सकेगा और कई आवश्यक जानकारियों का आदान प्रदान होना संभव हो सकेगा.
आ). सायबेस
जहाँ सायबेस बिलिंग प्रणाली लागू है वहां तीन माह से अधिक के आंकड़े उनके सिस्टम में संग्रहित नहीं रह पाते हैं जो कि प्रणाली का एक दोष है. प्रकोष्ठ में इस बात को गंभीरता से लिया एवं निरंतर इस पर काम किया. इसके लिए बिल प्रिंटिंग के डाटा का प्रिंटिंग स्रोत से लिया गया जो लगभग पिछले दो वर्षों का उपलब्ध हुआ. यद्यपि इसमें से उपभोक्ताओं के आंशिक डाटा उपलब्ध हो सके लेकिन उपलब्ध सभी डाटा से एक डाटा बैंक बनाया गया. एक सुखद बात यह है कि सायबेस के डाटा को ओरेकल डाटा बेस में परिवर्तित कर इस डाटा बैंक में संग्रहीत किया गया है. इसके दो लाभ हुए कि इस संग्रह में मेमोरी कि सीमा नहीं होती दुसरे यह आर एम् एस डाटा बेस के समकक्ष खड़ा हो गया है जो एक ही (कोमन) सोफ्टवेयर से संचालित होने लायक हो गया है. यह एक अप्रतिम उपलब्धि है.
'एच वी सी एम् एस' के बारे में संक्षिप्त जानकारी:
इस कोमन सोफ्टवेयर का नाम है 'एच वी सी एम् एस'. यह वेब साईट पर उपलब्ध है एवं मल्टी यूजर होने से कई लोग इसका सामानांतर उपयोग कर सकते हैं. इस साफ्टवेयर पर अभी और काम किया जा रहा है जिसमें मैदानी अधिकारीयों और एम् आर दी एम् प्रकोष्ठ में 'टू एंड फ्रो सूचना सम्बन्ध कायम हो सकेगा और कई आवश्यक जानकारियों का आदान प्रदान होना संभव हो सकेगा.
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| DFDT Meet at West Discom, Indore 1 |
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